नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026
मतदाता सूची में नाम दर्ज होना किसी भी पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार से जुड़ा है। ऐसे में मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवाल राजनीतिक बहस का विषय बनने के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इसी मुद्दे पर सोमवार, 12 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के कई विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकाला और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
इस मार्च में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और RJD नेता तेजस्वी यादव सहित कई नेता शामिल हुए। विपक्ष का विरोध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर था।
क्या है SIR और क्यों उठ रहे हैं सवाल?
SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision है। यह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची की जाँच और संशोधन किया जाता है। चुनावी प्रक्रिया में सही मतदाता सूची का होना जरूरी है, लेकिन इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने आशंका जताई है कि पात्र मतदाताओं के नाम भी हटाए जा सकते हैं।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में हुए बदलावों की पर्याप्त पारदर्शिता और स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए। नेताओं ने कथित अनियमितताओं की जाँच, नाम हटाने की प्रक्रिया में सुरक्षा उपाय और चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

पुलिस ने रोका मार्च, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई याचिका
दिल्ली में निकाला गया मार्च सुप्रीम कोर्ट से करीब 600 मीटर पहले पुलिस बैरिकेडिंग के कारण रोक दिया गया। इसके बाद विपक्ष की ओर से अदालत में याचिका दाखिल की गई। इसमें मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जाँच और SIR से जुड़े फैसलों की समीक्षा की मांग की गई।
प्रदर्शन के मद्देनजर राजधानी के छह मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास अस्थायी रूप से बंद किए गए। सुरक्षा व्यवस्था और यातायात पर भी असर पड़ा। इस घटनाक्रम ने चुनाव प्रक्रिया के साथ-साथ विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर भी चर्चा तेज कर दी।

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर
13 अक्टूबर को इस मामले से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई होनी थी, लेकिन न्यायमूर्ति वी. मोहना की तबीयत खराब होने के कारण इसे 15 अक्टूबर तक टाल दिया गया। अदालत ने प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार से जुड़े आरोपों पर भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा।
फिलहाल मामले में अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं आया है। आगे की सुनवाई में अदालत के सामने उठाए गए मुद्दों और संबंधित पक्षों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे।
लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूची की विश्वसनीयता और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार की सुरक्षा आवश्यक है। ऐसे में सवाल यह है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे? इसका जवाब राजनीतिक आरोपों से आगे बढ़कर तथ्यों, उचित जाँच और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से सामने आना चाहिए।
















