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संबोधन से सड़कों तक नेतन्याहू का विरोध, 77 प्रतिनिधिमंडलों का वॉकआउट

न्यूयॉर्क, 25 सितंबर 2026 संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के संबोधन के दौरान गुरुवार को बड़े स्तर पर विरोध देखने को मिला। नेतन्याहू के मंच पर पहुंचते ही कई देशों के प्रतिनिधि अपनी सीटों से उठकर महासभा कक्ष से बाहर चले गए। इसके चलते उनके संबोधन के दौरान…

न्यूयॉर्क, 25 सितंबर 2026

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के संबोधन के दौरान गुरुवार को बड़े स्तर पर विरोध देखने को मिला। नेतन्याहू के मंच पर पहुंचते ही कई देशों के प्रतिनिधि अपनी सीटों से उठकर महासभा कक्ष से बाहर चले गए। इसके चलते उनके संबोधन के दौरान सभा का बड़ा हिस्सा खाली दिखाई दिया।

इजरायली अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 77 देशों के प्रतिनिधिमंडल या तो महासभा कक्ष में मौजूद नहीं थे या नेतन्याहू के भाषण की शुरुआत में बाहर चले गए। हालांकि, इन सभी 77 देशों को औपचारिक रूप से “बहिष्कार करने वाला” कहना पूरी तरह सही नहीं होगा, क्योंकि कुछ प्रतिनिधिमंडल पहले से ही उस सत्र में मौजूद नहीं थे।

रिपोर्ट के अनुसार, तुर्किये, फलस्तीन, ट्यूनीशिया, सीरिया, अल्जीरिया, यमन, मिस्र, इराक, सऊदी अरब, जॉर्डन, ईरान, कतर, लेबनान, मलेशिया, इंडोनेशिया और कुवैत सहित कई देशों के प्रतिनिधियों ने विरोध में कक्ष छोड़ा या अपनी सीटें खाली रखीं। वहीं अमेरिका, जर्मनी और कुछ अन्य यूरोपीय देशों के प्रतिनिधि कक्ष में मौजूद रहे।

अपने करीब 40 मिनट के संबोधन में नेतन्याहू ने गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई का बचाव किया और इजरायल पर लगाए जा रहे नरसंहार के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने ईरान, तुर्किये, कतर और इजरायल की आलोचना करने वाले अन्य नेताओं पर भी निशाना साधा। भाषण के दौरान उन्होंने अपने आलोचकों को “moral cowards” कहकर संबोधित किया।

महासभा के बाहर भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। न्यूयॉर्क में प्रदर्शनकारियों ने गाजा में युद्ध और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ नारे लगाए। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर गाजा युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच मौजूद गहरे मतभेदों को सामने ला दिया।

नेतन्याहू के भाषण के दौरान खाली होती संयुक्त राष्ट्र महासभा की तस्वीरें इस घटनाक्रम का प्रमुख दृश्य बन गईं। हालांकि, अलग-अलग देशों की अनुपस्थिति के कारण अलग हो सकते हैं, इसलिए हर अनुपस्थित प्रतिनिधिमंडल को औपचारिक बहिष्कार का हिस्सा मानना उचित नहीं है। फिर भी, बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों का बाहर जाना गाजा युद्ध और इजरायल की नीतियों को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक तनाव को दर्शाता है।

Sources: Reuters, Al Jazeera, Anadolu Agency, Ynet, Reuters Connect.

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